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सफ़र-ए-रूह

Safar-e-Rooh · Journey of the SoulHindi / Urdu

निकलने वाले हैं एक रास्ते से, पहुँचे थे जहाँ बरसों पहले हम, दिखे अनगिनत रूप लोगों के, जब छोड़ के जाने की बात कहे हम।

पर फिर भी अब, यह एक आदत सी बन गई है, दुनिया की फ़ितरत अब, हमें समझ ही आ गई है। मुस्कुराके छोड़ देना ही अकलमंदी है, यह बात रूह में बस सी गई है।

धीरे-धीरे ही दूर करेंगे सबको, फिर भी बड़े पास नज़र आएँगे, जैसे लोगों ने जाते हुए हमें दिखाया, वही नज़ारा हम चले जाने के बाद दिखाएंगे।

यह बस सोचा ही था हमने, कि रूह ने बोला, "भाई...

भाई, मत भूल तू कौन है, तू कहाँ से है और क्यों है। दुनिया ने आज तक तुझे बड़े नज़ारे दिखाए, और उनके असली चेहरे तुझे खुद तक़दीर ने दिखाए।

मत कर खराब उस तक़दीर को तू, तेरे जाने के बाद भी, तेरे निशान यहाँ अच्छे ही छूटेंगे।"

और जहाँ जब जाएँ हम, वहाँ नए से सब बनाएंगे, नए रिश्ते पुराने ज़ख्मों को, यूँ ही भर देंगे।

पास रहने की तमन्ना रखने वाले, तुझे ढूँढ ही निकालेंगे, और छोड़ जाने वाले जो थे... उन्हें भी हमारे disappear होने का सुकून दे जाएँगे।